धरा‍ली (उत्तरकाशी) –20 से 30 सेकंड एक त्रासदी की दास्ताँ -भयानक दृश्य और पानी में बहते लोग

(1) परिचय: हिमालय की त्रासदी

5 अगस्त 2025 की दोपहर—लगभग 1:50 बजे—उत्तरकाशी जिले की धरा‍ली गाँव अचानक बदल गई। Kheer Ganga नदी की बाढ़ ने देखते ही देखते सुनामी की तरह गाँव को निगल लिया। यह घटना क्लाउडबर्स्ट या ग्लेशियल झील फटने से प्रेरित फ्लैश फ्लड का नतीजा थी, जिसने 20 से 30 सेकंड में बाज़ार, होटल, घरोँ और मार्केट को पूरी तरह तबाह कर दिया। लोग चीखते हुए भागने लगे; जैसे सब कुछ क्षणिक में मिट गया हो।

(2) दृश्यावलोकन: मची तबाही

  • दृश्य 20 सेकंड में विनाशकारी — वीडियो में साफ दिखता है कि पानी, कीचड़ और बड़े पत्थर की बेतहाशा लहरें एक “दीवार” की तरह गाँव पर टूटीं। बड़ा झटका तब लग रहा था जब जैसे घर पत्तियों की तरह ढहने लगे।
  • होते जा रहा विनाश — कई घर, ढाबे, होटल और दुकानों को जैसे कागज का डेक कार्ड पलटते हुए गिर गया। कई लोग पानी में बहते दिखाई दिए।
  • स्लड की गहराई — इसे 15 मीटर (लगभग 45 फु‍ट) गहरे कीचड़ और मलबे की धारा के रूप में बताया गया, जिसने गाँव की रूप‑रेखा ही बदल दी।

(3) क्षति और मृतक‑माथा‑खोने वाले

  • मरने वालों की संख्या — अभी तक अधिकारी पुष्टि कर चुके हैं कि कम से कम 4–5 लोग मृत पाए गए। एक अन्य शव मिलने से यह संख्या पाँच पर पहुँच चुकी है। कई परिवार अब भी अपने प्रियजनों की तलाश में हैं।
  • गुमशुदा व्यक्ति — अनुमान के मुताबिक 50 से 100 लोग अब भी लापता हैं, जिसमें 11 भारतीय सेना जवान शामिल हैं, जो पास के Harsil शिविर से जुड़े थे।
  • राहत और बचाए गए लोग — लगभग 130–190 लोग को बचाया जा चुका है, जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया; कुछ को अस्पताल और अस्थायी शिविर में रखा गया।

(4) कारणः क्लाउडबर्स्ट या ग्लेशियल झील फटना?

  • अनुकूल बारिश नहीं हुई — मौसम विभाग (IMD) के आंकड़े बताते हैं कि Uttarkashi क्षेत्र में उस दिन सिर्फ 6.5मिमी से 27मिमी तक बारिश दर्ज हुई, जो एक सामान्य घटना है, न कि क्लाउडबर्स्ट जैसा।
  • विज्ञान‑विश्लेषण बताता है — कई भू-विज्ञानियों की राय है कि यह घटना एक ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट (GLOF) यानी ग्लेशियर से बनने वाली झील का अचानक फटने से पैदा हुई। उससे ढेर सारा पानी और मलबा नीचे गाँव की ओर ढला।
  • अविकसित और अनियोजित निर्माण — गाँव के पास विकास बिना पर्यावरणीय अध्ययन के हुआ था। पुराने नदी-रूप रेखा पर नए होटल, होमस्टे और ढ़ांचे बनाए गए थे, जो अब बाढ़ में बह गए। विशेषज्ञों ने कहा कि पुराने गाँव का हिस्सा सुरक्षित रहा जबकि नया हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया।

(5) बचाव और राहत कार्या‍वली

  • आपात टिम तैनात — भारतीय सेना (Army), NDRF, SDRF, ITBP आदि सहित लगभग 200–225 कर्मी घटनास्थल पर पहुँचे। ड्रोन, हेलीकॉप्टर, ट्रैकर कुत्ते व भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया।
  • बदलती चुनौतियाँ — भारी बारिश, मलबे और टूटे सड़कों की वजह से, बचाव टिमों को हवाई, पैदल और ज़िपलाइन के माध्यम से पहुँचने में दिक्कतें हो रही थीं। मोबाइल-नेटवर्क बाधित हुआ, इसके चलते सैटेलाइट फोन का भी इस्तेमाल करना पड़ा।
  • राजनीतिक नेतृत्व का हस्तक्षेप — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जगह का मुआयना किया, मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश जारी किए, और प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत व्‍यर्थ सहायता का आश्वासन दिया।

(6) भयानक घटना से उभरते सबक

  1. जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियल जोखिम
    हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर्स तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियल झीलों में बढ़ता जलस्तर अचानक फट सकता है। इस घटना ने स्पष्ट किया कि ऐसे स्थानों की निगरानी आवश्यक है।
  2. घरेलू निर्माण और योजना में कमी
    अवैध या अनियोजित सब-डिविज़न और होमस्टे निर्माण पुराने खतरनाक नदी-मार्गों पर हुआ, जिसने जानमाल की भारी क्षति बढ़ाई। भू-विज्ञानी स्पष्ट कहते हैं कि पहाड़ी इलाकों में विकास योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए।
  3. तत्काल प्रतिक्रिया के संसाधन
    सेना-सहायता बिना देर के पहुंची, लेकिन कम्युनिकेशन बाधित हुआ, जिससे बचाव टिमों को चुनौती मिली। अगली बार बेहतर स्थानीय चेतावनी-प्रणाली, सैटेलाइट सेटअप और गाइडलाइन अहम होंगे।
  4. स्थानीय समुदाय का घाटा
    कई परिवारों का समूचा गिरा‑वासा चौपट हुआ—घर, व्यवसाय, खेती, अंदरूनी जीवन सभी बर्बाद हो गए। कई लोग आज भी अपने रिश्तेदारों की तलाश में हैं।

(7) योग – धरा‍ली का भविष्य अब क्या?

  • पुनर्निर्माण और पुनर्वास: प्रभावित परिवारों के लिए खान-पान, चिकित्सा, अस्थायी आवास, और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जा रही है। CM ने कहा कि सभी प्रभावितों के लिए हर संभव मदद दी जायेगी।
  • भू‑वैज्ञानिक निगरानी: क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों की नियमित जाँच, नदी मार्गों का अध्ययन और जोखिम मानचित्र तैयार करना अनिवार्य हो गया है।
  • नियामक सुधारों की आवश्यकता: पहाड़ी पर्यटन और रिहायशी योजनाओं में नियमों की पालना जरूरी है—खासकर नदी किनारे और भू-लड़खड़ाहट वाले क्षेत्रों में।
  • सामुदायिक चेतावनी प्रणाली: आगामी बरसात के लिए स्थानीय ग्राम और तीर्थयात्राओं में समय पर संदेश, चेतावनी और निकासी मार्ग की जानकारी देना सुरक्षित रहेगा।

निष्कर्ष

द्हराली की यह त्रासदी न केवल एक प्राकृतिक आपदा है, बल्कि यह उस इंसानी भूल की गवाही भी देती है—जब प्रकृति की संवेदी चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया जाए। केवल 20 सेकंड में विकराल विनाश हो गया, जिसने चारों ओर जीवन, संस्कृति, आय और आत्मसम्मान उखाड़ दिए।
ग्लेशियर फटना, अनियोजित निर्माण, सीमित मौसम डेटा—इन सभी कारकों ने मिलकर दोषपूर्ण योजना और विकास की सबसे दुखद मिसाल पेश की।

लेकिन अब समय है सीखने का—नियर भविष्य में धरा‍ली और आसपास के इलाकों में सतर्क, सुव्यवस्थित, और मानव-केंद्रित पुनर्निर्माण हो; प्राकृतिक चेतावनी संकेतों का सम्मान हो; और हमारी यात्रा और बसेरा सुरक्षित, संवेदनशील और सुदृढ़ बने।

For more such amazing content visit : https://insightsphere.in/

Post Comment

You May Have Missed